कोरोना से मुलाक़ात |

कोरोना से बचाव जरुरी है ।
परंतु जीवन की इस आपा धापी मे कुछ व्यंगय भी ज़रूरी है ।

कोरोना
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सुबह घर से निकली तो दिल दहल गया
नुक्कड़ पे खड़ा मिस्टर कोरोना मिल गया
देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था
धीरे धीरे करीब आ रहा था
मैंने जोड़ दिए हाथ, कहा राम राम
थोड़ा डरी, अंदर ही अंदर मरी ,
सकुचाई, जैसे तैसे हिम्मत जुटाई
और पूछा, भाई…
आजकल खूब मचा रहे कोहराम
बढ़िया चल रहा है तुम्हारा काम !
पर काहे हमे पेल रहे हो ?
तुम क्या विकास हो, जो इतना फैल रहे हो ?
वो बोला, देखो..
मेरे आने से कितना फायदा हो रहा है
अब “वर्क फ्रॉम होम” हो रहा है
हमने कहा…हट, देखो ज़रा
एक आतंकवादी ने जीवन से ऐसे पीछा छुड़ा लिया
“वर्क फ्रॉम होम” के चक्कर मे खुदका ही घर बम से उड़ा दिया ।
मंदिर , बाजार सब बन्द है,
कवि सम्मेलन तक रद्द है
वो बोला- अरे आरा…
छुट्टियां मनाओ और नो टेंशन
सोशल मीडिया पर रखो अटेंशन
मास्क की कालाबाज़ारी में हाथ बटाओ
कोरोना लो और दूसरों को लगाओ
इस तरह सब लोग एक सूत्र में बंध जाएंगे
साथ मे जी न पाए तो क्या, एक साथ मर तो पायेंगे ।
हमने कहा बहुत हुई बात, खत्म करो मुलाकात
तुम भी अपने काम मे व्यस्त रहो
लेकिन सुनो, खुश रहो और मस्त रहो ।
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. – आयुषि राखेचा

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